वक़्त से क़दम मिलाने थे, पता ही नहीं चला

कब चेहरा आगे निकल गया ओर क़दम पीछे छूट गये।

चेहरे को मेक-अप का सहारा मिला।

बेचारे क़दम उसमें भी पीछे छूट गये।

बदन के लिए कब महंगे कपड़े आ गये पता ही भी चला,

क़दम उसमें भी पीछे छूट गये।

एक दिन नीचे देखा तो एहसास हुआ,

ज़िंदगी में दिखावे के चक्कर में अपनी पहचान ही भूल गया।