Poetry

  • ज़िंदगी

    वक़्त से क़दम मिलाने थे, ये अरमान था कभी, मगर पता ही न चला सफ़र बदल गया सभी। चेहरा तो आगे बढ़ता गया रोशनी के साथ, और बेचारे क़दम पीछे रह गये थक कर हर बार। चेहरे को मेक-अप का सहारा मिलता गया, झूठी चमक में हर आईना सजता गया। तालियाँ भी मिलीं, महफ़िलें भी…

  • Writer in me

    The day your voice drifts into my night, I lose every reason left to write. You come and steal my words, my soul, Only to leave them at my door once more— for I am no longer yours.