ज़िंदगी
वक़्त से क़दम मिलाने थे, ये अरमान था कभी, मगर पता ही न चला सफ़र बदल गया सभी। चेहरा तो आगे बढ़ता गया रोशनी के साथ, और बेचारे क़दम पीछे रह गये थक कर हर बार। चेहरे को मेक-अप का सहारा मिलता गया, झूठी चमक में हर आईना सजता गया। तालियाँ भी मिलीं, महफ़िलें भी…